SHRI DURGA ASHTOTHARA SATANAMA STOTRAM

     श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्
दुर्गा दारिद्र्यशमनी दुरितघ्नी दुरासदा
लक्ष्मी लज्जा महाविद्या श्रद्धा पुष्टिः स्वधा ध्रुवा ॥१-११॥
महारात्रिर्महामाया मेधा माता सरस्वती
शिवा शशिधरा शान्ता शांभवी भूतिदायिनी  ॥१२-२१॥
तामसी नियता दारी काली नारायणी कला
ब्राह्मी वीणाधरी वाणी शारदा हंसवाहिनी  ॥२२-३२॥
त्रिशूलिनी त्रिनेत्रेशा त्रयी त्रेतामयी शुभा
शंखिनी चक्रिणी घोरा कराली मालिनी मतिः ॥३३-४४॥
महेश्वरी महेष्वासा महिषघ्नी मधुव्रता
मयूरवाहिनी नीला भारती भास्वरांबरा ॥४५-५२॥
पीतांबरधरा पीता कौमारी पीवरस्तनी
रजनी रथिनी रक्ता गदिनी घंटिनी प्रभा ॥५३-६२॥
शुंभघ्नी सुभगा सुभ्रूः निशुंभप्राणहारिणी
कामाक्षी कामुकी कन्या रक्तबीजनिपातिनी ॥६३-७०॥
सहस्रवदना सन्ध्या साक्षिणी शांकरी द्युतिः
भार्गवी वारुणी विद्या धरा धरसुरार्चिता ॥७१-८०॥
गायत्री गायकी गंगा दुर्गा गीतघनस्वनी
छंदोमयी मही छाया चार्वंगी चंदनप्रिया ॥८१-९०॥
जननी जाह्नवी जाता शांभवी हतराक्षसी
वल्लरी वल्लभा वल्ली वल्यलंकृतमध्यमा ॥९१-९९॥
हरीतकी हयारूढा भूतिर्हरिहरप्रिया
वज्रहस्ता वरारोहा सर्वसिद्धिस्तथैव च ॥१००-१०६॥
वरविद्या तथा दुर्गादेवीत्यष्टोत्तरं शतम् ॥१०७-१०८॥


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