YAMUNASHTAKAM-1

                                  यमुनाष्टकम्-1
मुरारिकायकालिमाललामवारिधारिणी
तृणीकृतत्रिविष्टपा त्रिलोकशोकहारिणी ।
मनोनुकूलकूलकुञ्जपुञ्जधूतदुर्मदा
धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥१॥
मलापहारिवारिपूरभूरिमण्डितामृता
भृशं प्रवातकप्रपञ्चनातिपण्डितानिशा ।
सुनन्दनन्दिनांगसंगरागरञ्जिता हिता
धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥२॥
लसत्तरंगसंगधूतभूतजातपातका
नवीनमाधुरीधुरीणभक्तिजातचातका।
तटान्तवासदासहंससंवृताह्निकामदा
धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥३॥
विहाररासखेदभेदधीरतीरमारुता
गता गिरामगोचरे यदीयनीरचारुता।
प्रवाहसाहचर्यपूतमेदिनीनदीनदा
धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥४॥
तरंगसंगसैकतान्तरातितं सदासिता
शरन्निशाकरांशुमञ्जुमञ्जरी सभाजिता।
भवार्चनाप्रचारुणांबुनाधुना विशारदा
धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥५॥
जलान्तकेलिकारि चारुराधिकांगरागिणी
स्वभर्तुरन्यदुर्लभांगताङ्गतांशभागिनी ।
स्वदत्तसुप्तसप्तसिन्धुभेदिनातिकोविदा
धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥६॥
जलच्युतांगरागलंपटालिशालिनी
विलोलराधिकाकचान्तचंपकालिमालिनी।
सदावगाहनावतीर्णभर्तृभृत्यनारदा
धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥७॥
सदैव नन्दिनन्दकेलिशालिकुञ्जमञ्जुला
तटोत्थफुल्लमल्लिकाकदंबरेणुसूज्ज्वला ।
जलावगाहिनां नृणां भवाब्धिसिन्धुपारदा
धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥८॥


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