SHIVA ASHTOTTARA SATANAMAVALI

श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामावलिः
ओं शिवाय नमः
ओं महेश्वराय नमः
ओं शंभवे नमः
ओं पिनाकिने नमः
ओं शशिशेखराय नमः
ओं वामदेवाय नमः
ओं विरूपाक्षाय नमः
ओं कपर्दिने नमः
ओं नीललोहिताय नमः
ओं शंकराय नमः                            १०
ओं शूलपाणये नमः
ओं खट्वांगाय नमः
ओं विष्णुवल्लभाय नमः
ओं शिपिविष्टाय नमः
ओं अम्बिकानाथाय नमः
ओं श्रीकण्ठाय नमः
ओं भक्तवत्सलाय नमः
ओं भवाय नमः
ओं शर्वाय नमः
ओं त्रिलोकेशाय नमः                          २०
ओं शितिकण्ठाय नमः
ओं शिवाप्रियाय नमः
ओं उग्राय नमः
ओं कपर्दिने नमः
ओं कामारये नमः
ओं अन्धकासुरसूदनाय नमः
ओं गंगाधराय नमः
ओं ललाटाक्षाय नमः
ओं कालकालाय नमः
ओं कृपानिधये नमः                        ३०
ओं भीमाय नमः
ओं परशुहस्ताय नमः
ओं मृगपाणये नमः
ओं जटाधराय नमः
ओं कैलासवासिने नमः
ओं कवचिने नमः
ओं कठोराय नमः
ओं त्रिपुरान्तकाय नमः
ओं वृषाङ्काय नमः
ओं वृषभारूढाय नमः                        ४०
ओं भस्मोद्धूलितविग्रहाय नमः
ओं सामप्रियाय नमः
ओं स्वरमयाय नमः
ओं त्रयीमूर्तये नमः
ओं अनीश्वराय नमः
ओं सर्वज्ञाय नमः
ओं परमात्मने नमः
ओं सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः
ओं हविषे नमः
ओं यज्ञमयाय नमः                         ५०
ओं सोमाय नमः
ओं पञ्चवक्त्राय नमः
ओं सदाशिवाय नमः
ओं विश्वेश्वराय नमः
ओं वीरभद्राय नमः
ओं गणनाथाय नमः
ऒं प्रजापतये नमः
ओं हिरण्यरेतसे नमः
ओं दुर्धर्षाय नमः
ओं गिरीशाय नमः                         ६०
ओं गिरिशाय नमः
ओं अनघाय नमः
ओं भुजंगभूषणाय नमः
ओं भर्गाय नमः
ओं गिरिधन्वने नमः
ओं गिरिप्रियाय नमः
ओं कृत्तिवाससे नमः
ओं पुरारातये नमः
ओं भगवते नमः
ओं प्रमथाधिपाय नमः                     ७०
ओं मृत्युञ्जयाय नमः
ओं सूक्ष्मतनवे नमः
ओं जगद्व्यापिने नमः
ओं जगद्गुरवे नमः   
ओं व्योमकेशाय नमः
ओं महासेनजनकाय नमः
ओं चारुविक्रमाय नमः
ओं रुद्राय नमः
ओं भूतपतये नमः
ओं स्थाणवे नमः                        ८०
ओं आहिर्बुध्न्याय नमः
ओं दिगंबराय नमः
ओं अष्टमूर्तये नमः
ओं अनेकात्मने नमः
ओं सात्त्विकाय नमः
ओं शिद्धविग्रहाय नमः
ओं शाश्वताय नमः
ओं खण्डपरशवे नमः
ओं अजाय
ओं पापविनाशनाय नमः   
               ९०
ओं मृडाय नमः
ओं पशुपतये नमः
ओं देवाय नमः
ओं महादेवाय नमः
ओं अव्ययाय नमः
ओं हरये नमः
ओं भगनेत्रभिदे नमः
ओं अव्यक्ताय नमः
ओं दक्षाध्वरहराय नमः
ओं हराय नमः                            १००
ओं पूषदन्तभिदे नमः
ओं अव्यग्राय नमः
ओं सहस्राक्षाय नमः
ओं सहस्रपदे नमः
ओं अपवर्गप्रदाय नमः
ओं अनन्ताय नमः
ओं तारकाय नमः
ओं परमेश्वराय नमः 
                     १०८
    
इति श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामावलिः


Sri P R Ramamurthy Ji was the author of this website. When he started this website in 2009, he was in his eighties. He was able to publish such a great number of posts in limited time of 4 years. We appreciate his enthusiasm for Sanskrit Literature. Authors story in his own words : http://ramamurthypr1931.blogspot.com/

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