LYRICS OF “ALOKAYE RUKMINI KALYANA GOPALAM” BY NARAYANA TEERTHA

Lyrics of “Alokaye Rukmini kalyana gopalam” by
Narayana Teertha
Kriti: आलोकये रुक्मिणी कल्याण गोपालम्
Raga:  Kamboji
Tala:      Adi
 Pallavi (refrain)
 आलोकये रुक्मिणी कल्याण गोपालम्
Anupallavi
नीलमेघनिभाकारं बालार्कसमचेलं।
नीलांबरानुजं गोप-पालकं नीलालकान्तम्॥  (आलोकये..)
Charanam
द्वारकापुर-मण्डपे द्वादशादित्य-सन्निभे
भूरिरत्न-सिंहासने
भूसुरघने।
वीरासने सुखासीनं विश्वमङ्गलदायिनं
धीरयोगिसंसेवनं देवकीवसुदेवसुतम्॥ १॥(आलोकये..)
अष्टमहिषीसमेतं अमरनारीसुसेवितं
तुष्टपुष्टजनावृतं तुंबुरुगीतम् ।
इष्टजनसमाश्रितं ईश्वरमपराजितं
दृष्ट-सर्व-लोकजातं देवराजादि विनुतम्॥२॥
(आलोकये..)
शंखदुन्दुभि-नादिते शतशो-गन्धर्वादि-गीते
पुंखानुपुंख-निगम-बुधजनावृते ।
पङ्कजेक्षण-रंभादि-पटुनटन-विनोदिते
कुङ्कुम-केसर-वर्षिते कोमलाकर-चरिते॥३॥(आलोकये..)
दिव्य-किरीट-कुण्डलं दीप्त पीतांबरधरं
नव्य-मुक्तामणिहारं
नानाविहारम्।
अव्ययभूतिविस्तारं अमरनारी-सुराधारं
दिव्य-कौस्तुभ-सुंदरं भक्तमानस-सञ्चारम्॥४॥(आलोकये..)
हेम-मुक्तामणि-छत्रं हीर-रत्न-कटिसूत्रं
चामर-व्यजनावृतं शरदिन्दुवक्त्रं।
कामकॊटि-समगात्रं कनकाङ्गदादि विचित्रं
श्यामसुन्दरं पवित्रं शरणागतोद्धारगोत्रम्॥५॥ (आलोकये..)
चन्द्रानना भैष्मी भामा जांबवती
सत्या मित्र-
विन्दा भद्रा लक्ष्मणा कालिन्दी
नायकम्
नन्दनन्दन-माश्रित-बृन्द-बृन्दारक-वन्द्यं
नन्दित-नारायण-तीर्थानन्ददं
आनन्दकन्दम्॥६॥ (आलोकये..)



Sri P R Ramamurthy Ji was the author of this website. When he started this website in 2009, he was in his eighties. He was able to publish such a great number of posts in limited time of 4 years. We appreciate his enthusiasm for Sanskrit Literature. Authors story in his own words : http://ramamurthypr1931.blogspot.com/

Author Socials Follow me

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.