GAURIPATI SANKIRTANAM

गौरीपति संकीर्तनम् 
गौरीपते जय गौरीपते जय ।
गौरीपते जय गौरीपते  ॥
       —
सन्ततशोभन संसारभञ्जन।
सन्तोषभाषण पालय माम् ॥१॥  (गौरी…)
अंगजचारुशरीरविनाशन।
पुङ्गवकेतन पालय माम् ॥२॥
(गौरी…)
अन्तकनाशनाहन्ताविनाशन।
सिन्धुरनाशन पालय माम् ॥३॥
(गौरी…)
गङ्गातरङ्गभुजङ्गविभूषण
शृंगारोज्ज्वल
पालय माम् ॥४॥ (गौरी…)
पार्वतिवल्लभ
पापविमोचन
सकलानन्द पालय माम् ॥५॥
(गौरी…)
बालेन्दुमण्डन फालविलोचन
नीलकण्ठेश्वर पालय माम् ॥६॥
(गौरी…)
दक्षाध्वरान्तक दाक्षायणीनाथ
दक्षिणामूर्ते पालय माम् ॥७॥   (गौरी…)
कारुण्यसागर कामदायिन् पर्-
मानन्दरूप नमामि शंभो  ॥८॥ (गौरी…)
निष्कल निर्मल नित्य निरञ्जन।
निष्कलङ्कात्मन् नमामि विभो ॥९॥ (गौरी…)
राजशिखामणे तेजोनिधे त्याग-
राजमहेश नमामि शम्भो    ॥१०॥ (गौरी…)
भक्तप्रिय शिव शंकर चिन्मय
ब्रह्मस्वरूप नमामि विभो  ॥११॥  (गौरी…)
योगिजनाश्रय रोगविनाशन।
भोगिविभूष नमामि शंभो ॥१२॥ (गौरी…)
संसारभञ्जन कंसारिरञ्जन।
हंसाद्यगम्य नमामि विभो ॥१३॥ (गौरी…)
आधिविनाशन व्याधिविनाशन।
स्वाधीनमोक्ष नमामि विभो ॥१४॥ (गौरी…)
पङ्कजबाणभयंकर शङ्कर।
पङ्कविहीन नमामि विभो ॥१५॥(गौरी…)
अन्ताद्यहीन सदन्तरंगस्थित।
सन्ततं कान्त नमामि विभो ॥१६॥(गौरी…)
गौरीपते जय गौरीपते जय ।
गौरीपते जय गौरीपते  ॥

Click here to go to the Master Index from where you can access more than 750 posts

http://prramamurthy1931.blogspot.com/2011/09/master-index-of-posts.html

Sri P R Ramamurthy Ji was the author of this website. When he started this website in 2009, he was in his eighties. He was able to publish such a great number of posts in limited time of 4 years. We appreciate his enthusiasm for Sanskrit Literature. Authors story in his own words : http://ramamurthypr1931.blogspot.com/

Author Socials Follow me

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.