SHANMUKHA PRATIMUKHA ASHTOTTARA SATANAMAVALI-2

      श्रीषण्मुखप्रतिमुख अष्टोत्तरशतनामावलिः
                
द्वितीयं मुखम्
     Chant the
names prefixing ’ओं’  and suffixing ‘नमः’
     ध्यानम्
     वन्देसिन्दूरकान्तिं शरविपिनभवं श्रीमयूराधिरूढं
     षड्वक्त्रं देवसेनामधुरिपुतनयावल्लभं द्वादशाक्षम्।
     शक्तिं बाणं कृपाणं ध्वजमपि च गदां चाभयं सव्यहस्तै-
     श्चापं वज्रं सरोजं कटकमपिवरं
शूलमन्यैर्दधानम्॥

श्रीमते

स्कन्दाय
शुभाकाराय
सेनान्ये
श्रितरक्षकाय
देवसेनाहृदिलसत्सरसीरुहदिवाकराय
वल्लीमनोब्जमार्ताण्डाय
प्रणवार्थसुनिश्चयाय
कृत्तिकाऋक्षसञ्जाताय
कृत्तिवासस्तनूद्भवाय                     १०
षट्कृत्तिकाकुचक्षीरपायिने
षण्मुखमूर्तिमते
निजकार्यसमुद्यताय
भक्तमन्दारपादपाय
वज्रिकॢप्ततपफलाय
योगिने
परमपुरुषाय
भवाब्धिपोताय
कुमाराय
गुणवारिधये                २०
सुराध्यक्षाय
सुरानन्दाय
सूर्यकोटिसमप्रभाय
भक्तिप्रियाय
भक्तिगम्याय
भक्तवाञ्छितदायकाय
जातरूपसमाकाराय
जगदाश्चर्यकारकाय
सुदीर्घषट्बाहुयुताय
मयूरारोहणोत्सुकाय                ३०
दिव्यरत्नकिरीटभासापूरितदिगन्तराय
उत्तुङ्गस्कन्धनिक्षिप्तरत्नाङ्गदमाणिक्यनटत्प्रभाय
कर्णाभरणगण्डभागोच्चलत्कराय
मन्दस्मितलसद्वक्त्रकान्तामानससारसाय
भक्ताभयहस्ताब्जाय
कौशेयांशुशोभिताय
क्रौञ्चाद्रिभेदचतुराय
तारकासुरभञ्जनाय
कोदण्डगुणटङ्कारसुपूरितदिगन्तराय
सर्वायुधधराय                    ४०
शूराय
दैत्यकाननपावकाय
ताम्रचूडध्वजाय
कान्ताय
शरजन्मने
सनातनाय
विप्रप्रियाय
विप्ररूपाय
प्रख्याताय
विजयाय                   ५०

अनघाय
निर्मलाय
निष्क्रियाय
नित्याय
निर्गुणाय
निर्विकाराय
सदानन्दाय
सर्वसाक्षिणे
सत्यवाचे
सत्यविक्रमाय               ६०
सत्यसन्धाय
सत्यरूपाय
सत्यज्ञानस्वरूपवते
जितकामाय
जितक्रोधाय
कामदाय
करुणालयाय
गुरवे
त्रिलोकाधिपतये
गुणालंकृतविग्रहाय            ७०  
लोकस्वामिने
महादेवाय
सर्वोपद्रवदूरकृते
सर्वरोगप्रशमनाय
दक्षिणामूर्तिरूपयुजे
गणेशपूर्वजाय
राज्ञे
कन्दर्पशतसुन्दराय
कमनीयमहोरस्काय
मुनिमानससारसाय           ८०
अन्तश्शत्रुहराय
शान्ताय
आपत्तिमिरभास्कराय
तुष्टाय
पुष्टिकराय
शिष्टाय
श्रेष्ठाय
शिष्टजनावनाय
शरण्याय
शर्मदाय                   ९०
सर्गाय
शरणागतवत्सलाय
जगद्व्यापिने
जगन्नाथाय
शर्वतनयाय
दानतत्पराय
धात्रे
धर्मरताय
धर्मिणे
दक्षाय                     १००
दाक्षिण्यवर्धनाय
सुब्रह्मण्याय
परब्रह्मणे
सामगानसदाप्रियाय
कटाक्षदत्तसौभाग्याय
कारुण्यमयविग्रहाय
सुखदाय
सौख्यनिलयाय
शीघ्रानुग्रहदायकाय      १०९

Author Socials Follow me