SRI MADANAMOHANASHTAKAM

       श्रीमदनमोहनाष्टकम्
जय शंखगदाधर नीलकलेवर पीतपटाम्बर देहि पदम् ।
जय चन्दनचर्चित कुण्डलमण्डित कौस्तुभशोभित देहि पदम् ॥१॥
जय पंकजलोचन मारविमोहन पापविखण्डन देहि पदम्।
जय वेणुनिनादक रासविहारक बङ्किमसुन्दर देहि पदम्॥२॥
जय धीरधुरन्धर  अद्भुतसुन्दर
दैवतसेवित देहि पदम्।
जय विश्वविमोहन मानसमोहन संस्थितिकारण देहि पदम्॥३॥
जय भक्तजनाश्रय नित्यसुखालय अन्तिमबान्धव देहि पदम्।
जय दुर्जनशासन केलिपरायण कालियमर्दन देहि पदम् ॥४॥
जय नित्यनिरामय दीनदयामय चिन्मय माधव देहि पदम्।
जय पामरपावन धर्मपरायण दानवसूदन देहि पदम् ॥५॥
जय वेदविदांवर गोपवधूप्रिय वृन्दावनधन देहि पदम्।
जय सत्यसनातन दुर्गतिभञ्जन सज्जनरञ्जन देहि पदम्॥६॥
जय सेवकवत्सल करुणासागर वाञ्छितपूरक देहि पदम्।
जय पूतधरातल देवपरात्पर सत्त्वगुणाकर देहि पदम् ॥७॥
जय गोकुलभूषण कंसनिषूदन सात्वतजीवन देहि पदम्।
जय योगपरायण संसृतिवारण ब्रह्मनिरञ्जन देहि पदम् ॥८॥

Sri P R Ramamurthy Ji was the author of this website. When he started this website in 2009, he was in his eighties. He was able to publish such a great number of posts in limited time of 4 years. We appreciate his enthusiasm for Sanskrit Literature. Authors story in his own words : http://ramamurthypr1931.blogspot.com/

Author Socials Follow me

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.