SRI RAMAKRISHNA SUPRABHATAM – 1

              श्रीरामकृष्णसुप्रभातम् -१
श्रीराजमान मुखनिर्गतदिव्यभानो
    घोराज्ञतान्धतमसोत्करचण्डभानो
स्वाराज्यसौख्यद निजाङ्घ्रिजुषामजस्रं
    श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥१॥
संसारतापविवशाखिलमानवानां
   कंसारिनामजपभेषजरत्नदायिन्।
हिंसां मनोवचनकायगतां विधुन्वन्
   श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥२॥
कालीनेषेवणपरायण नैकशोक
   पालीवशावशजनावनबद्धबुद्धे
नालीकनेत्र करुणामृतपूरितात्मन्
   श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥३॥
नानाजनाभिनुतवैभव लोकमातृ-
   ध्यानाभिलीननिजमानसपुण्यमूर्ते।
मानातिरिक्तमहिमान्वितमान्यकीर्ते
   श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥४॥
वेदान्ततत्त्वकथनैर्भवशोकभाजां
   स्वेदापनोदननिदान
विरक्तयोगिन्।
मोदावहोक्तिमकरन्दरसप्रदायिन्
    श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥५॥
अक्षामकान्तिपरिवेषपरीतमूर्ते
    शिक्षाविचक्षण विशिष्टगुणाम्बुराशे।
वीक्षाविशोषितभवार्णव भव्यराशे
   श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥६॥
  विश्वासभक्तियुतसंसृतितापभाजां
     आश्वासदायक दयामृतवारिराशे।
  विश्वाभिनन्द्यगुण  विश्रुतदिव्यनामन्
    श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥७॥
  वीताशसर्वविषयेषु सदा नितान्त-
     पूतान्तरंग जनजाड्यविनाशकारिन्।
  स्फीतात्मबोध विविधागमतत्त्ववेदिन्
     श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥८॥
दिव्यप्रभावलयितानन  पादभाजां
   भव्यप्रदानपर मुक्तिपथप्रदायिन्।
स्तव्य प्रकृष्टमहिमान्वितदिव्यमूर्ते
   श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥९॥
अत्यन्तनिर्मलमनस्क समस्तलोकैः
    स्तुत्यस्वभाव भवशोकविनाशहेतो
 प्रत्यग्रभव्यपथदर्शक भक्तियोगिन्
     श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥१०॥
सन्तानितात्मसुख भारतमातृदिव्य-
   सन्तानसत्तम सनातनधर्मचारिन्।
सन्तापनाशन सदा शरणागतानां
   श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥११॥
वैराग्यशान्तिमणिमन्दिरदिव्यदीप्ति-
   पूराभिदीप्तमुख सत्त्वगुणैकसिन्धो।
सारामलाशय सदाशयगीतकीर्ते
   श्री रामकृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम्॥१२॥
 यः प्रातरेतदतिपावनसुप्रभातं
    श्रीरामकृष्णशुभनामनि सुप्रणीतम्।
भक्त्या पठेत्स तु  भवार्णवपारमेत्य
    मुक्त्यास्पदं मुररिपोः पदमाशु यायात् ॥१३॥
  

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