HYMNS TO KRISHNA – SRI VATAPURANATHA ASHTAKAM

श्रीवातपुरनाथाष्टकम्
कुन्दसुम बृन्दसममन्दहसितास्यं
नन्दकुलनन्द भर तुन्दलनकन्दम्
पूतनिजगीतलवधूत दुरितं तम्
वातपुरनाथमिममातनु हृदब्जे
॥ १ ॥
नीलतर जालधर भालहरि रम्यं
लोलतर शीलयुत बालजनलीलम् ।
जालनति शीलमपि पालयितुकामं
वातपुरनाथमिममातनु हृदब्जे
॥ २ ॥
कंसरणहिंसमिह संसरणजात-
क्लान्तिभरशान्तिकर कान्ति
झरवीरम् ।
वातमुख धातुजनि पातभयघातं
वातपुरनाथमिममातनु हृदब्जे
॥ ३ ॥
जातु धुरि पातुकमिहातुरजनं
द्राक्
शोक भरमूकमपि तोकमिव पान्तम्
भृङ्गरुचिसंगरकृदङ्गलतिकं तं
वातपुरनाथमिममातनु हृदब्जे
॥ ४ ॥
पापभवतापभरकोपशमनार्त्था-
श्वासकर भासमृदुहासरुचिरास्यम्
रोगचय भोगभय वेगहरमेकं
वातपुरनाथमिममातनु हृदब्जे
॥ ५ ॥
घोषकुल दोषहर वेषमुपयान्तं
पूषशत भूषक विभूषण गणाढ्यम्
भुक्तिमपि मुक्तिमपि भक्तिषु
ददानं
वातपुरनाथमिममातनु हृदब्जे
॥ ६ ॥
पापक दुरापमतिचापहर शोभ-
स्वापघनमापतदुमापति समेतम्
दीनतर दीनसुखदानकृत दीक्षं
वातपुरनाथमिममातनु हृदब्जे
॥ ७ ॥
पादपतदादरण मोदपरिपूर्णं
जीवमुख देवजन सेवनफलाङ्घ्रिम्
रूक्ष भव मोक्षकृत दीक्ष जनवीक्षं
वातपुरनाथमिममातनु हृदब्जे
॥ ८ ॥
        
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