DUSSWAPNANIVARANA SHLOKAH

          दुःस्वप्नादिनिवारणश्लोकः
दुःस्वप्नदुश्शकुनदुर्गतिदौर्मनस्य-
दुर्भिक्षदुर्व्यसनदुस्सहदुर्यशांसि।
उत्पाततापविषभीतिमसद्ग्रहार्तिं
व्याधींश्च नाशयतु मे जगतामधीशः॥१॥

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