GANESHA ASHTOTTARA SATANAMAVALI-4

श्री गणेशाष्टोत्तरशतनामावलिः-4
Chant the names prefixing ‘ओं’ and suffixing ‘नमः’
गणेश्वराय
गणक्रीडाय
महागणपतये
विश्वकर्त्रे
विश्वमुखाय
दुर्जयाय
दुर्वहाय
जयाय
सुरूपाय
सर्वनेत्राधिवासाय                  १०
वीरासनाश्रयाय
योगाधिपाय
तारकस्थाय
पुरुषाय
गजकर्णकाय
चित्राङ्गश्यामदशनाय
फालचन्द्राय
चतुर्भुजाय
ब्रह्मतेजसे
यज्ञकायाय                      २०
सर्वात्मने
सामबृंहिताय
कुलाचलांशाय
व्योमनाभये
कल्पद्रुमवनालयाय
निम्ननाभये
स्थूलकुक्षये
पीनवक्षसे
बृहद्भुजाय
पीनस्कन्धाय                    ३०
कंबुकण्ठाय
लम्बोष्ठाय
लम्बनासिकाय
सर्वावयवसंपूर्णाय
सर्वलक्षणलक्षिताय
इक्षुचापधराय
शूलिने
कान्तिकन्दलिताश्रयाय
अक्षमालाधराय
ज्ञानमुद्रावते                     ४०
विजयावहाय
कामिनीकामनाय
काममालिने
केलिलालिताय
अमोघसिद्धये
आधाराय
आधाराधेयवर्जिताय
इन्दीवरदलश्यामाय
इन्दुमण्डलनिर्मलाय
कर्मसाक्षिणे
कर्मकर्त्रे                    ५०
कर्मफलप्रदाय
कमण्डलुधराय
कल्पाय
कपर्दिने
कटिसूत्रभृते
कारुण्यदेहाय
कपिलाय
गुह्यागमनिरूपिताय
गुहाशयाय
गुहाब्धिस्थाय               ६०
घटकुंभाय
घटोदराय
पूर्णानन्दाय
परानन्दाय
धनदाय
धरणीधराय
बृहत्तमाय
ब्राह्मणप्रियाय
ब्रह्मपराय
ब्रहविद्प्रियाय               ७०
भव्याय
भूतालयाय
भोगदात्रे
महामनसे
वरेण्याय
वामदेवाय
वन्द्याय
वज्रनिवारणाय
विश्वकर्त्रे
विश्वचक्षुषे                  ८०
हवनाय
हव्यकव्यभुजे
स्वतन्त्राय
सत्यसंकल्पाय
सौभाग्यवर्धनाय
कीर्तिदाय
शोकहारिणे
त्रिवर्गफलदायकाय
चतुर्बाहवे
चतुर्दन्ताय                      ९०
चतुर्थीतिथिसंभवाय
सहस्रशीर्ष्णे
पुरुषाय
सहस्राक्षाय
सहस्रपदे
कामरूपाय
कामगतये
द्विरदाय
द्वीपरक्षकाय
क्षेत्राधिपाय                 १००
क्षमाभर्त्रे                  
लयस्थाय
लड्डुकप्रियाय
प्रतिवादिमुखस्तंभाय
दुष्टचित्तप्रसादनाय
भगवते
भक्तिसुलभाय
याज्ञिकाय
याजकप्रियाय                    १०८

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